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शनिवार, 9 जुलाई 2016
Kundaliya
सोमवार, 11 मार्च 2013
भारतीय सनातनी छन्द - मेरी कुछ रचनाएं!
कुंडलिया छंद
दिल्ली के दरबार में, चले न जन का जोर,
बैठाए खुद आपने, मन के काले चोर/
मन के काले चोर, कर रहे भाषणबाजी,
लगता है यह शोर, नहीं अब जनता राजी,
जन जन में आक्रोश,उड़ाते जब ये खिल्ली,
धर लो मन संकल्प,न जाएँ अब ये दिल्ली//१//
दिल्ली हांड़ी काठ की, ताप बढे जर जाय,
शीत लहर है देश में, दिल्ली तो झुलसाय/
दिल्ली तो झुलसाय, सुरक्षित रही न नारी,
कौन हमें बतलाय , कौन सी यह बीमारी,
ले लो प्रण इस वर्ष , झौंक दो पूरी सिल्ली,
होय न अब दुष्कर्म , बार दो चाहे दिल्ली//२//
शनिवार, 6 मार्च 2010
उज्जैन मंदिर दर्शन!
शिव पुराण की कोटि रूद्र संहिता के सोलहवे अध्याय में तृतीय ज्योतिर्लिंग भगवान महाकाल के संबंध में सूत जी द्वारा जिस कथा का वर्णन किया है उस के अनुसार अवन्ती नगरी(उज्जैन) में एक वेद कर्मरत ब्राह्मण प्रतिदिन पार्थिव शिवलिंग का पूजन करता था उन दिनों रमाल पर्वत पर दूषण नाम का राक्षस ब्रम्हाजी से प्राप्त वरदान के कारण सभी धर्मस्थलों के धार्मिक कार्य को बाधित करता था. उसने अवन्ती नगरी में भी ब्राम्हणों से धर्म कर्म के कार्य छोड़ देने को कहा नहीं मानने पर राक्षस की सेना ने उत्पात मचाना प्रारंभ कर दिया जन त्रस्त होकर भगवान शंकर की शरण में जाकर स्तुति करने लगे, तब ब्राम्हण जहां पार्थिव शिवलिंग का पूजन करता था वहां विशाल गड्डा होगया और भगवान शिव का विराट स्वरुप प्रकट हुआ उन्होंने भक्तों को आश्वस्त किया और एक हुँकार के साथ राक्षस और उसकी सेना को भस्म कर दिया. तत्पश्चात भक्तों से वरदान माँगने को कहा. अवन्तिका वासियों ने प्रार्थना की-
महाकाल महादेव ! दुष्ट दण्ड कर प्रभो
(समाचार-पत्र दैनिक भास्कर से साभार)
श्रीमहाकालेश्वर मन्दिर
भारत
के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में एक मात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर
मन्दिर मोक्षदायिनी शिप्रा नदी के पूर्वी तट के निकट स्थित है। इस मन्दिर का
इतिहास पुराना है और इसका उल्लेख शिवपुराण, नृसिंहपुराण, स्कन्दपुराण, वराहपुराण
आदि ग्रंथों में मिलता है।
इस मन्दिर में शिखर के निकट श्रीनागचंद्रेश्वर
मन्दिर स्थित है, जिसे वर्ष में एक बार श्रावण मास में नागपंचमी के दिन दर्शनार्थ
खोला जाता है। इससे नीचे के तल अर्थात भूतल पर श्रीओंकारेश्वर मन्दिर स्थित है जबकि
गर्भगृह में भगवान् श्रीमहाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग स्थापित है। गर्भगृह में ज्योतिर्लिंग
पूर्व में कार्तिकेय, उत्तर में पार्वती एवं पूर्व में श्रीगणेश की मूर्ति स्थापित
है। गर्भगृह का द्वार नक्काशीदार रजत पत्र से सुशोभित है। गर्भगृह के बाहर शिव वाहन
नंदिकेश्वर विराजित है। सभा मंडप में श्रीगणेश, देवी अन्नपूर्णा, श्रीराम मन्दिर
एवं उज्जैन की अधिष्ठात्री देवी उज्जयिनी माता का मन्दिर भी स्थापित हैं। सभा मंडप
के सम्मुख कोटितीर्थ कुण्ड स्थापित है।
मन्दिर के पृष्ठ भाग में भव्य वृद्ध महाकालेश्वर मन्दिर एवं बाल हनुमान मदिर
स्थापित हैं।
मन्दिर
प्रांगण में सिद्धि गणेश मन्दिर, स्वप्नेश्वर महादेव मन्दिर, साक्षी गोपाल मन्दिर,
नीलकंठेश्वर महादेव मन्दिर एवं नवग्रह स्थापित हैं। स्वप्नेश्वर मन्दिर में निकट
ही नृसिंह मन्दिर एवं बद्रीनारायण मन्दिर स्थित हैं।
मन्दिर
का पुनर्निर्माण सिंधिया काल में हुआ है। दर्शनार्थियों की सुविधा हेतु प्रशासन ने
वर्ष 1980 से कई अन्य निर्माण मन्दिर प्रांगण में किये हैं। प्रातः चार बजे भस्म
आरती के साथ ही मन्दिर के पट खोले जाते हैं जो रात ग्यारह बजे शयन आरती के पश्चात्
बन्द होते हैं। दोपहर पश्चात् प्रतिदिन महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का मनमोहक शृंगार
किया जाता है।
श्रावण मास एवं भादौ की अमावस्या तक आये
प्रति सोमवार सांध्य समय श्रीमहाकालेश्वर के रजत मुघौटों की सवारी निकाली जाती है।
इसके अंतर्गत आने वाले अंतिम सोमवार को शाही सवारी निकाली जाती है जिसमें जिसमें
नगर के भजन मंडल, अखाड़े एवं मध्य-प्रदेश का पुलिस दल भी सम्मिलित होता है। सवारी
के दर्शन हेतु बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन सवारी मार्ग के आस-पास एकत्रित होते हैं।
महाशिवरात्रि के अवसर पर मन्दिर में शिव
विवाह का भव्य आयोजन किया जाता है। इसके अगले दिन प्रातः एवं दोपहर समय अर्थात् दो
बार भस्म आरती की जाती है।