हरसिद्धि देवी मन्दिर
(शक्ति पीठ)
शिप्रा नदी के रामघाट से उपर चढ़ने पर माँ हरसिद्धि देवी का मन्दिर स्थित है। यह एक शक्तिपीठ है। शिवपुराणानुसार राजा दक्ष प्रजापति के हवन-कुण्ड से भगवान् शिव द्वारा माता सती को उठाकर ले जाने से माता सती के भारत में विभिन्न जगह अंग गिरने का उल्लेख है। उज्जैन में हरसिद्धि देवी मन्दिर स्थान पर उनकी कोहनी गिरने का उल्लेख आया है। इसकारण इसे शक्तिपीठ का दर्जा प्राप्त है। यहाँ गर्भगृह में एक शिला पर शिवयंत्र स्थापित है जिसकी नित्य पूजा की जाती है। माता द्वारा चण्ड-मुण्ड नामक दो राक्षसों का वध करने के कारण इन्हें हरसिद्धि कहा जाता है। कहा जाता है कि यह राजा विक्रमादित्य की आराध्य देवी रही है।
इस
मन्दिर परिसर में श्री महामाया और श्रीगणेश मन्दिर भी स्थापित हैं। मन्दिर के
दक्षिण में एक बावड़ी है जिसे एक तीर्थ कहा जाता है। मन्दिर प्रांगण में ही एक
हनुमान मन्दिर तथा कटकटेश्वर मन्दिर स्थापित हैं। मराठा साम्राज्य में इस मन्दिर
का जीर्णोद्धार हुआ है। प्रांगण में ही मन्दिर के सम्मुख दो विशाल दीपस्तम्भ बने
हैं। नवरात्रि सहित अन्य अवसरों पर यह दीपमालाएं प्रज्ज्वलित की जाती हैं। जो बहुत
ही चित्ताकर्षक होती हैं।


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